DA बकाया मामले में पंजाब के मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा ने हाईकोर्ट से मांगी बिना शर्त माफी, ₹1 लाख का जुर्माना भी लगाया गया
चंडीगढ़: पंजाब के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के महंगाई भत्ते (DA) के बकाया भुगतान से जुड़े मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। इस मामले में पंजाब के मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई चल रही है। इसी बीच मुख्य सचिव ने हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बिना शर्त माफी मांगी है।
मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा ने अदालत में कहा कि वह सरकारी स्तर पर मिली जानकारी पर निर्भर थे और अदालत को गुमराह करने का उनका कोई इरादा नहीं था। उन्होंने अपनी गलती के लिए बिना शर्त माफी मांगते हुए अदालत से राहत देने की अपील की है। फिलहाल मामले की सुनवाई जारी है।

अदालत ने लगाया एक लाख रुपये का जुर्माना
इस मामले में हाईकोर्ट के जस्टिस हर्ष बंगड़ ने DA बकाया भुगतान से संबंधित स्टेटस रिपोर्ट और अनुपालन रिपोर्ट दाखिल न करने पर मुख्य सचिव पर एक लाख रुपये की कॉस्ट लगाई है। अदालत ने यह राशि हाईकोर्ट लॉयर्स वेलफेयर फंड में जमा करवाने के निर्देश दिए हैं।
गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को आपराधिक अवमानना का कारण बताओ नोटिस जारी किया था। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट में दायर स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) से संबंधित जानकारी को लेकर कथित तौर पर अदालत को गुमराह करने के आरोप में शुरू हुई थी।
आरोप है कि मुख्य सचिव ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपील की कमियों को दूर करने का दावा किया था, जबकि अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार वे कमियां अभी भी लंबित थीं।
3 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के आदेश
अदालत ने मुख्य सचिव को 30 अक्टूबर 2026 तक अपना व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने और 3 नवंबर 2026 को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने के निर्देश दिए थे। इसके बाद मुख्य सचिव की ओर से हलफनामा दाखिल कर बिना शर्त माफी मांगी गई है।
क्या है पूरा DA बकाया मामला?
दरअसल, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 3 अगस्त 2026 को पंजाब सरकार को आदेश दिया था कि वह केंद्रीय पैटर्न के अनुसार सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स की महंगाई भत्ते (DA) की सभी लंबित किस्तों का बकाया दो सप्ताह के भीतर जारी करे।
अदालत ने यह भी टिप्पणी की थी कि जब तक कर्मचारियों और पेंशनर्स के बकाया भुगतान नहीं किए जाते, तब तक सरकार को विज्ञापनों जैसे गैर-जरूरी खर्चों पर रोक लगानी चाहिए।
अब इस मामले में मुख्य सचिव की ओर से माफी मांगे जाने के बाद सभी की नजरें हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं। कर्मचारियों और पेंशनर्स को भी अपने लंबे समय से लंबित DA बकाया भुगतान को लेकर अदालत के फैसले का इंतजार है।









