पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले EC सख्त, अधिकारियों के तबादलों को लेकर जारी किए निर्देश
ECI की 10 सदस्यीय टीम दो दिवसीय पंजाब के दौरे पर है
चुनाव की प्रशासनिक और सुरक्षा संबंधी तैयारियों की समीक्षा
इनका उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाना
चुनाव से जुड़े अधिकारियों को गृह जिले में नहीं रखा जाएगा
जिला प्रशासन और पुलिस विभाग तक सीमित नहीं ये निर्देश
आबकारी और परिवहन विभागों के अधिकारियों पर भी लागू
पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। चुनाव आयोग ने चुनाव से जुड़े अधिकारियों की तैनाती और तबादलों को लेकर निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखना है। भारतीय चुनाव आयोग (ECI) की 10 सदस्यीय टीम दो दिवसीय पंजाब के दौरे पर है, जहां राज्य में चुनाव की प्रशासनिक और सुरक्षा संबंधी तैयारियों की समीक्षा की जा रही है।

अधिकारियों की तैनाती और तबादलों को लेकर निर्देश
चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार, चुनाव से सीधे जुड़े अधिकारियों को उनके गृह जिले में तैनात नहीं रखा जाएगा। जिन अधिकारियों ने पिछले चार वर्षों के दौरान किसी जिले में तीन साल पूरे कर लिए हैं या निर्धारित कट-ऑफ तारीख तक तीन साल पूरे कर लेंगे, उन्हें नियमानुसार उस जिले से स्थानांतरित करना होगा। इन निर्देशों के दायरे में DEO, RO, ARO और पुलिस विभाग के चुनाव संबंधी जिम्मेदारियां निभाने वाले अधिकारी शामिल हैं।
ऊपर के अधिकारियों को फिर तैनात नहीं किया जाएगा
पुलिस उपनिरीक्षक (SI) से लेकर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक, चुनाव सुरक्षा और पुलिस बल की तैनाती से जुड़े अधिकारियों पर भी ये निर्देश लागू होंगे। SI को उनके गृह जिले में तैनात नहीं किया जाएगा। इसके अलावा, जिला निर्वाचन अधिकारी, रिटर्निंग ऑफिसर, सहायक रिटर्निंग ऑफिसर, पुलिस निरीक्षक और SI या उससे ऊपर के अधिकारियों को वहां दोबारा तैनात नहीं किया जाएगा, जहां वे पिछले चुनाव या उपचुनाव में तैनात थे।
पुलिस, आबकारी और परिवहन विभाग भी दायरे में
चुनाव आयोग के निर्देश केवल जिला प्रशासन और पुलिस विभाग तक सीमित नहीं हैं। आबकारी और परिवहन विभागों के अधिकारियों पर भी ये लागू होंगे। जिन अधिकारियों के आधिकारिक कार्यों से संबंधित आपराधिक मामले अदालत में लंबित हैं, उन्हें चुनाव संबंधी जिम्मेदारियां नहीं सौंपी जाएंगी। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य चुनाव के दौरान प्रशासनिक निष्पक्षता बनाए रखना और किसी भी तरह के हितों के टकराव से बचना है।








